क्या आप अपनी गायों से प्रेम करते हैं ? sahiwal cow | gaye | cow |

क्या आप अपनी गायों से प्रेम करते हैं :-  आप अपनी गायों को चारा देते हैं, दाना डालते हैं, उनकी स्वछता का ध्यान रखते हैं, गायों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए खूब प्रयास करते हैं,  लेकिन इस लेख में हम आपसे यह पूछना चाहते हैं कि क्या आप अपनी गायों को प्रेम करते हैं ? जब हम गायों की बात करेंगे तो हमारा मतलब सिर्फ देसी गायों से होगा। क्योंकि अंग्रेजी गायों से हम प्रेम की उम्मीद नहीं कर सकते क्योंकि वह एक पशु कहलाने के तो लायक हैं लेकिन उनमें प्रेम की कमी है। अगर आप प्रेम का दर्शन करना चाहते हैं तो आपको देसी गौपालन करना होगा। देसी गायों में वैसे तो बहुत खूबियाँ हैं लेकिन उनकी सबसे विलक्षण खूबी उसका अपने मालिक से प्रेम करना है। जो लोग देसी गायों को पाल रहे हैं वो मेरी बात से जरूर सहमत होंगे।  
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गायें आपसे प्रेम चाहती हैं :- 

देसी गौपालक जब अपनी गायों को बुलाता है तो वो झट से दौड़ी आती हैं। मालिक की आवाज़ सुनकर वो चारा खाना भी छोड़ देती हैं। क्योंकि वह अपने मालिक का प्रेम चाहती हैं। यह लक्षण आपको सिर्फ देसी गायों में ही नजर आएंगे। देसी गायें यह चाहती हैं है कि हम उनके पास रहें , उनको दुलारें, उनकी पीठ और गलकंबल को खुजलाते रहें। वो चाहती हैं कि हम उनकी पीठ थपथपाते रहें, उनके सर पर हाथ फेरते रहें। गायें हमसे ज़्यादा से ज़्यादा प्रेम की उम्मीद करती हैं। 
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गायों के आलिंगन का पवित्र भाव हमें माँ के प्रेम का अहसास करवा देता है: 

अपने मालिक का प्रेम पाने के लिए देसी गायों में एक अलग तरह की होड़ लगी रहती है। जब मालिक एक गाय को प्रेम कर रहा होता है तो दूसरी गायों में ईर्ष्या के भाव स्पष्ट दिखाई देते हैं, कभी-कभी ऐसा होता है कि जिस गाय को मालिक प्रेम कर रहा होता है दूसरी गायें उस गाय को मारती हैं क्योंकि वह चाहती हैं कि अब हमारी बारी है, तुमने मालिक का बहुत प्यार ले लिया, अब हमें यह अवसर का मौका दो। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि गाय को मारने की बजाये वो हल्के से अपने मालिक को ही मारती हैं, लेकिन उनका प्रहार मालिक को चोट नहीं पहुँचता। वो बस इतनी सी टक्कर मारती हैं कि मालिक को यह एहसास हो जाए कि अब मुझे सहलाने की बारी है। कैसा विलक्षण प्रेम का दृश्य होता है यह ! यह दृश्य मन को भाव विभोर कर देता है। गायों के आलिंगन का पवित्र भाव हमें माँ के प्रेम का अहसास करवा देता है। 
देसी गायों के छोटे-छोटे नन्हे-मुन्ने बछड़े-बछड़ियाँ भी अपनी माताओं से कम नहीं होते। जब आप उनके बाड़े में जाते हैं तो उनमें भी एक अलग तरह की होड़ लगी होती है। वो आपके साथ खेलना चाहते हैं, मालिक के बाड़े में आने के बाद उनके अंदर अलग तरह की ऊर्जा का प्रसार देखने को मिलता है। सारा दिन वह बछड़े-बछड़ियाँ इंतजार करते हैं कि कब मेरा मालिक मेरे बाड़े में आएगा और मुझे दुलारेगा।

गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी ने गौ प्रेम के विषय में कहा:

देसी गोपालन बहुत बातों को सिखाता है, हमने गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के सानिध्य में रहकर यह जाना कि गौ माता को बाकी सब चीज़ों के इलावा प्रेम की भी आवश्यकता होती है। सज्जनों, गौ माँ आपसे सिर्फ चारे की उम्मीद नहीं रखती, वो तो आपका पूरा समर्पण चाहती है। 

गायों को कभी डंडा न मारें 

गौपालन से जुड़े कुछ लोग गायों को पशु समझ डंडा मारते हैं या उन्हें डांटते हैं। जहाँ ऐसा होता है वहां गायों के मुखमंडल पर प्रसन्नता के भाव नजर नहीं आते। ऐसे स्थानों पर गायें डरी-डरी सी जीवन व्यतीत करती हैं। जिस स्थान पर गायें डर के माहौल में रहती हैं वहां हमें अमृततुल्य दूध की प्राप्ति कैसे हो सकती है। आप यह नियम बना लें कि हम कभी भी अपनी गौ माताओं को डंडा नहीं मारेंगे। मेरे गुरुदेव जी ने तो हमें यहां तक कहा हुआ है कि कभी भी गायों को डंडा नहीं मारना, बेशक वह अपना दिया हुआ सारा दूध ही क्यों ना गिरा दें। जिस दिन गौमाता दूध गिरा देती हैं उस दिन समझें वो दूध हमारे पीने लायक ही नहीं होता। हिंसा से लिया गया दूध हमें कभी भी स्वस्थ नहीं होने देगा। अगर आपको हमारी बात पर यकीन नहीं हो रहा तो आप अपने घर में गायों के बीच में इस बात को सिद्ध करने के लिए एक ट्रेल करके देख लें। कुछ दिन आप गायों को दुलारना बंद कर दें और अपने हाथ में डंडा लेकर उनको मारना शुरू कर दें। दो-चार दिनों में ही आपको परिणाम पता लग जाएंगे। गायों का दूध कम हो जाएगा, उनके चेहरे से प्रसन्नता के भाव लुप्त हो जाएंगे। गायें आपसे डरने लगेगी। आप खुद भी अशांत हो जायेगे।

प्रभु का हर जीव प्रेम का भूखा होता है, हमने कई बार टेलीविजन में देखा है कि प्रेम की भाषा से लोगों ने शेरों को भी अपने आधीन कर लिया है। अगर जंगल के राजा सिंह को प्रेम से वश में किया जा सकता है तो गौ माता को क्यों नहीं।
कई गौ भक्तों ने बताया कि गौमाता हमारे अंदर चल रहे विचारों को भी पकड़ लेती हैं, जब कभी आप कोई परेशानी महसूस करें तो आप अपनी गायों के पास चले जाएं, आप पाएंगे कि गौमाता आपके पास आ जाएगी और आपको चाटने लगेगी, वह आपको परेशानी से उबारने के लिए हर संभव प्रयास करेंगी। गौमाता बेजुबान नहीं है, वह सब समझती है।

गायों को प्रसन्न रखने के कुछ सुझाव 

गायों को प्रसन्न करने के लिए आप कई तरह के प्रयास कर सकते हैं। आजकल कई कंपनियों ने ऐसी मशीनों का निर्माण किया है जिनके अंदर मोटर और सेंसर लगे होते हैं। जब गायें उनके पास जाती हैं तो उन मशीनों के ब्रश खुद-ब-खुद चलने लग जाते हैं। वो ब्रश गायों को खुजलाने लगते हैं। ऐसा होने से गौ माँ बहुत प्रसन्न हो जाती हैं। अगर किसी कारणवश आप ऐसी मशीनें ना खरीद पाए तो आप छोटे ब्रश खरीद सकते हैं जिनको ”खरखरा” कहते हैं। आप उस खरखरे को हाथों में लेकर दिन में एक या दो बार गायों के पीठ पर खुजली कर सकते हैं।

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अगर आपको नंदी से डर लगता है तो आप खरखरे को हाथों में लेकर नंदी को खुजलाना शुरू कर दें, एक या दो दिन में नंदी आपका दोस्त बन जाएगा। अगर गौ माता आपको प्रेम से चाट रही हो तो उसे चाटने दें, क्योंकि उसके पास अपने प्रेम का इजहार करने के लिए एकमात्र जीभ ही उपलब्ध है। कभी-कभी आपने देखा होगा कि गौ माता जब आपको प्रेम कर रही होती है तो उसकी आंखों से अश्रु बहते हैं, यह अश्रु उसके प्रेम का प्रगटीकरण ही होते हैं। गौ माता की मूक भाषा को सुनने का प्रयास करें, कोई तो कारण रहा होगा कि भगवान श्री कृष्ण गौ माताओं के बीच जाकर अपना सारा दिन बिता दिया करते थे। उन्हें दुलारते थे, प्रेम करते थे और बदले में गौमाता उन पर अपना प्रेम लुटाया करती थी।

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  • आएं हम प्रभु के इस पावन, सुंदर और विनम्र जीव को अपने गले से लगाएं।
  • आएं प्रण लें कि आज के बाद हम कभी भी अपनी गायों को डंडा नहीं मारेंगे।
  • आएं प्रण लें कि आज के बाद हम दिन में एक या दो बार अपनी गायों के पास जाकर उन्हें दुलारेंगे। 
ऐसा नहीं है कि हम इस लेख के माध्यम से यह कह रहे हैं कि आप सभी लोग शायद अपनी गौ माताओं से प्रेम नहीं करते, ऐसी बात नहीं है, हो सकता है आप हमसे भी ज्यादा अपनी गौ माताओं को प्रेम करते हों। लेकिन जो ऐसा नहीं करते हम उन्हें कह रहे हैं कि वो कृपया आज से ही अपनी गौ माताओं को प्रेम करना प्रारंभ कर दें। ऐसा करने पर आप कुछ दिनों में ही अपने अंदर और अपने गोपालन में अभूतपूर्व परिवर्तन देखेंगे।

इस लेख को अंत तक पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

आपको यह लेख कैसा लगा हमारे साथ अपने विचार जरूर साझा करें। आपके कमेंट हमें नई दिशा प्रदान करेंगे। हो सके तो इस लेख को सबके साथ शेयर करें। 

गौ माता जय गोपाल

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12 thoughts on “क्या आप अपनी गायों से प्रेम करते हैं ? sahiwal cow | gaye | cow |”

  1. बहुत सुंदर जानकारी, अपने अनुभव साझा करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद भैया जी। मेरी इच्छा है कि मैं भी जैविक खेती, गोपालन, वैदिक शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के बढ़ावे के लिए कार्य करूँ। भारत आने पर आपसे विचार करूँगा। जय श्रीराम????

  2. आपके डिस्टीबयुटर सीमन की डोज महंगी देते है जी

  3. संजय कुमार

    बहुत प्रेम करते हैं हम अपने गायों से साहिवाल फार्म ढीगा वाली पंजाब

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